क्या है मेरी बारी में | हरिवंश राय बच्चन की कविता

क्या है मेरी बारी में कविता हरिवंश राय बच्चन की एक भावनात्मक कविता है। यहाँ बारी शब्द का उपयोग किया गया है। बारी के दो अर्थ हैं, एक बारी यानी बाग़, और दूसरा अर्थ है जो आगे आने वाला है (बारी – Turn )। इन् दोनों अर्थों को बच्चन जी ने बखूबी व्यक्त किया है। शायद इसलिए हरिवंश राय बच्चन, छायावाद के महान कवियों में सब ऊपर हैं।

इस पोस्ट में मैं “क्या है मेरी बारी में” कविता का अर्थ बताने का प्रयास करूंगा। आशा करता हूँ आपको ये पसंद आएगा।

हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी कविताओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण मिलता है। उनके द्वारा रचित कविता ‘क्या है मेरी बारी में’ एक महत्वपूर्ण रचना है जो पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है।

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क्या है मेरी बारी में

क्या है मेरी बारी में कविता के बोल

क्या है मेरी बारी में।

जिसे सींचना था मधुजल से
सींचा खारे पानी से,
नहीं उपजता कुछ भी ऐसी
विधि से जीवन-क्यारी में।
क्या है मेरी बारी में।

आंसू-जल से सींच-सींचकर
बेलि विवश हो बोता हूं,
स्रष्टा का क्या अर्थ छिपा है
मेरी इस लाचारी में।
क्या है मेरी बारी में।

टूट पडे मधुऋतु मधुवन में
कल ही तो क्या मेरा है,
जीवन बीत गया सब मेरा
जीने की तैयारी में|
क्या है मेरी बारी में

~ हरिवंश राय बच्चन

क्या है मेरी बारी में कविता का अर्थ

क्या है मेरी बारी में।

जिसे सींचना था मधुजल से
सींचा खारे पानी से,
नहीं उपजता कुछ भी ऐसी
विधि से जीवन-क्यारी में।
क्या है मेरी बारी में।

~ हरिवंश राय बच्चन

ये क्या है मेरी बारी में कविता की शुरुआत की पंक्तियाँ हैं। यहाँ शायद हरिवंश राय बच्चन, अपने जीवन को एक बारी अर्थात बगिया से सम्बोधित कर रहे हैं। इसमें कवि ने अपने जीवन की दशा व्यक्त की है, शायद अपने जीवन का अवलोकन कर रहे हैं। यहाँ पे कवि अपने जीवन की अनिश्चितता का अनुभव करते हैं।

जिस बगिया, उपवन या जीवन को मधुजल से सींचना चाहिए था, उससे खारे पानी से सींचा। इसका अर्थ ये है के जीवन की परिस्थितयां अच्छी नहीं रही, बल्कि ये जीवन बुरी परिस्थितियों से जूझने में निकल गया। और इस जीवन में, जो परिस्थितियों से लड़ते हुए बीता हो, वैसे जीवन में कुछ भी उपलब्ध नहीं होता। जैसे खारे पानी से सींचे क्यारी में कुछ भी नहीं उपजता। शायद खारा पानी आंसुओं का द्योतक है।

अर्थात इस दुखी जीवन में कुछ भी अच्छा हासिल नहीं हुआ।

आंसू-जल से सींच-सींचकर
बेलि विवश हो बोता हूं,
स्रष्टा का क्या अर्थ छिपा है
मेरी इस लाचारी में।
क्या है मेरी बारी में।

~ हरिवंश राय बच्चन

इन पंक्तियों में कवि ने स्पष्ट किया है के उनके जीवन में आंसू हैं, दुःख है, और इस दुःख और आंसू के जल से अपने जीवन की बगिया में बेली बोते हैं। अर्थात इस दुःख से भरे हुए जीवन में भी स्वप्न देखते हैं, कुछ आशा करते हैं। श्रष्टा – जो सृष्टि का निर्माण करता है। कवि इस सृष्टि के निर्माण करने वाले के बारे में प्रश्न करते हैं की इस दुःख और आंसू भरे जीवन में आशा और उम्मीद देने का क्या अर्थ है।

कवि अपनी लाचारी दर्शाते हैं। वो लाचार हैं की अपने जीवन में आने वाले पलों को वो बिना दुःख और आंसू के नहीं सजा सकते। उनके आने वाले पल भी उन्हें दुःख और आंसू से भरे दिखते हैं। भला ऐसी उम्मीद की लाचारी में इश्वर उनके जीवन को कौन सा लक्ष्य दे रहे हैं?

टूट पडे मधुऋतु मधुवन में
कल ही तो क्या मेरा है,
जीवन बीत गया सब मेरा
जीने की तैयारी में|
क्या है मेरी बारी में

~ हरिवंश राय बच्चन

कवि कहना चाहते हैं की अगर मधुवन में मधुऋतु भी आ जाए। अर्थात कुछ अच्छे पल भी आ जाएँ, तो भी मेरा कल क्या है? मेरा भविष्य क्या है ? जैसा आज है वैसा भी कल होगा। ये जीवन तो बीत गया, जीने की तैयारी में।

जहाँ तक मेरा एहसास कहता है बहुत से लोग इन् पंक्तियों में अपना जीवन देख सकते हैं। कल को अच्छा बनाने के लिए आज कड़ी मेहनत करते हैं और आशा करते हैं के कल वो आराम से जी पाएंगे। परन्तु वो कल कभी आता ही नहीं। भविष्य के लिए वो अपने वर्त्तमान को नहीं जी पाते। और जो भविष्य की कल्पना वो करते हैं, वैसा भविष्य नहीं आता।

क्या है मेरी बारी में कविता का भाव

क्या है मेरी बारी कविता में हरिवंश राय बच्चन जीवन के प्रति एक निराशा का भाव व्यक्त कर रहे हैं। अपने जीवन को एक ऐसी बगिया से सम्बोधित कर रहे हैं जिनकी क्यारियों को खारे पानी सींचा गया हो। यहाँ खारा पानी दुःख और आंसू का प्रतीक है। एक दुःख से घिरा मनुष्य अपने जीवन में आगे दुःख और आंसू ही देखता है।

एक अच्छे भविष्य की कल्पना भी हो सकती। भविष्य की अनिश्चितता का भाव है। और भविष्य जिसके लिए हम आज काम करते हैं, आज दुःख उठाते हैं, और उठाते जाते हैं, परन्तु वो भविष्य नहीं आता। और यही निराशा का कारण है।

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