प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर! | महादेवी वर्मा की कविता | अर्थ, सारांश, भावार्थ

कविता “प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर!” में कवयित्री ने अश्रुओं को केवल दुख का चिह्न न मानकर, उन्हें जीवन की शुद्ध, सतत बहती संवेदना के रूप में प्रस्तुत किया है। यह रचना छायावाद की उस परंपरा को सशक्त करती है जहाँ मन, प्रकृति और भावना एक-दूसरे में विलीन हो जाते हैं।

हिंदी साहित्य के छायावाद युग में महादेवी वर्मा की कविताएँ करुणा, संवेदना और आत्मिक अनुभूति की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में भावुकता केवल व्यक्तिगत नहीं रहती, बल्कि वह सार्वभौमिक मानवीय अनुभव का स्वरूप ले लेती है।


“प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर!” महादेवी वर्मा की एक प्रसिद्ध छायावादी कविता है, जिसमें अश्रुओं को करुणा, शुद्धि और जीवन की सतत संवेदना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह कविता बताती है कि पीड़ा के भीतर से भी आत्मिक सौंदर्य और पवित्रता का जन्म संभव है।

प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर महादेवी वर्मा छायावाद कविता

प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर! – कविता

(कविता को यथावत रखा गया है — कोई परिवर्तन नहीं)

प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर!
दुख से आविल सुख से पंकिल,
बुदबुद् से स्वप्नों से फेनिल,
बहता है युग-युग अधीर!

जीवन-पथ का दुर्गमतम तल
अपनी गति से कर सजल सरल,
शीतल करता युग तृषित तीर!

इसमें उपजा यह नीरज सित,
कोमल कोमल लज्जित मीलित;
सौरभ सी लेकर मधुर पीर!

इसमें न पंक का चिन्ह शेष,
इसमें न ठहरता सलिल-लेश,
इसको न जगाती मधुप-भीर!

तेरे करुणा-कण से विलसित,
हो तेरी चितवन में विकसित,
छू तेरी श्वासों का समीर!

~ प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर! — (महादेवी वर्मा)

प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर! – सारांश (Summary)

छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा की यह कविता अश्रुओं को एक नए और गहरे दार्शनिक अर्थ में प्रस्तुत करती है। यहाँ अश्रु केवल दुख की प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि वे जीवन की सक्रिय, पवित्र और सतत बहने वाली संवेदना का रूप ले लेते हैं। कवयित्री स्पष्ट करती हैं कि आँसू केवल पीड़ा से नहीं, बल्कि सुख, स्वप्न, आशा और अनुभूति से भी जन्म लेते हैं। यही कारण है कि वे युगों-युगों से बहती मानवीय चेतना का प्रतीक बन जाते हैं।

कविता में अश्रु जीवन-पथ के उन हिस्सों को सरल बनाते हैं जो अत्यंत दुर्गम और कठोर हैं। जहाँ जीवन थकान, तपन और तृषा से भर उठता है, वहाँ ये आँसू शीतलता और सहजता प्रदान करते हैं। इस रूप में अश्रु मनुष्य के भीतर छिपी उस शक्ति को दर्शाते हैं जो पीड़ा को सहन ही नहीं करती, बल्कि उसे मानवीय संवेदना में रूपांतरित कर देती है।

अश्रु-नीर से उत्पन्न ‘नीरज’ (कमल) कविता का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीक है। कमल की तरह ही यह पवित्रता कीचड़ और मलिनता से अछूती रहती है। इसका आशय यह है कि पीड़ा और कष्ट के वातावरण में भी मनुष्य के भीतर आत्मिक सौंदर्य, लज्जा, कोमलता और निर्मलता जन्म ले सकती है। यह नीरज किसी भौतिक आकर्षण या आसक्ति से बंधा नहीं, बल्कि आत्मिक ऊँचाई का संकेत है।

पूरी रचना में करुणा मूल भाव के रूप में प्रवाहित होती है। अश्रु करुणा से जन्म लेते हैं, करुण दृष्टि से विकसित होते हैं और अंततः उसी में विलीन हो जाते हैं। करुणा यहाँ दुर्बलता नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च शक्ति के रूप में उभरती है। कविता यह संदेश देती है कि जो मनुष्य संवेदनशील है, वही सच्चे अर्थों में जीवित है।

अंततः यह कविता पाठक को यह बोध कराती है कि सच्ची संवेदनशीलता, करुणा और भावों का प्रवाह ही जीवन को भीतर से शुद्ध, गहन और अर्थपूर्ण बनाता है। आँसू जीवन की हार नहीं, बल्कि उसकी सबसे मानवीय और उज्ज्वल अभिव्यक्ति हैं।

काव्य-सौंदर्य व छायावाद से संबंध

  • प्रतीकात्मकता: अश्रु-नीर, नीरज (कमल), तृषित तट—आत्मिक अवस्थाओं के सशक्त प्रतीक
  • आत्मानुभूति: निजी भाव से सार्वभौमिक अनुभूति तक का विस्तार
  • प्रकृति-मानव एकात्मता: भावनाएँ प्रकृति-रूपकों में घुलती हुई
  • करुणा का केन्द्रीय भाव: छायावाद की मूल आत्मा

निष्कर्ष

महादेवी वर्मा ने इस कविता में अश्रुओं को कमजोरी नहीं, शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया है। यही दृष्टि इसे आज के पाठक के लिए भी प्रासंगिक बनाती है—जहाँ संवेदना को साहस और करुणा को जीवन-दृष्टि के रूप में देखा जाता है।

प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1: इस कविता का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर: कविता का मुख्य विषय अश्रु है, जिसे महादेवी वर्मा ने दुख की कमजोरी नहीं, बल्कि करुणा, शुद्धि और जीवन के निरंतर प्रवाह के रूप में प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 2: कविता में ‘अश्रु-नीर’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: ‘अश्रु-नीर’ आँसुओं का जल है, जो यहाँ जीवन के अनुभवों—दुख और सुख—दोनों का द्रव रूप बनकर सामने आता है।

प्रश्न 3: ‘नीरज’ (कमल) का प्रतीक क्या दर्शाता है?

उत्तर: नीरज या कमल पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि पीड़ा के भीतर से भी सौंदर्य और आत्मिक शुद्धि का जन्म हो सकता है।

प्रश्न 4: यह कविता छायावाद से कैसे जुड़ती है?

उत्तर: कविता में आत्मानुभूति, करुणा, प्रकृति-प्रतीक और भावनात्मक गहराई—ये सभी छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो इसे इस काव्यधारा से जोड़ती हैं।

प्रश्न 5: कविता का संदेश क्या है?

उत्तर: कविता का संदेश यह है कि करुणा और संवेदना मनुष्य को भीतर से शुद्ध बनाती हैं, और जो भाव बहते रहते हैं वही जीवन को गहराई और अर्थ प्रदान करते हैं।



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