3 बुद्धिमान भाई – पैनी निगाह और बुद्धिमानी की कहानी ~ (Story of Keen Observation and Wisdom)

परिचय ~ (3 बुद्धिमान भाई)

यह एक कहानी है 3 बुद्धिमान भाई। उत्सुक अवलोकन, पैनी निगाह और बुद्धिमानी की कहानी। यह हिंदी में एक नैतिक कहानी है। गहन अवलोकन पर एक कहानी। ज्ञान की एक कहानी। कैसे गहन अवलोकन और बुद्धिमत्ता ने तीन बुद्धिमान भाइयों की जान बचाई।


3 बुद्धिमान भाई | पैनी निगाह और बुद्धिमानी की कहानी | Keen Observation and Wisdom | Moral Story in Hindi | नैतिक कहानी

कहानी ~ 3 बुद्धिमान भाई

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3 बुद्धिमान भाई | पैनी निगाह और बुद्धिमानी की कहानी | Keen Observation and Wisdom | Moral Story in Hindi | नैतिक कहानी

एक समय की बात है। एक गरीब आदमी था जिसके तीन बेटे थे, वह अक्सर अपने बेटों से कहता मेरे बेटों, हमारे पास ना तो रुपया पैसा है, ना सोना चांदी है इसीलिए तुम्हे एक दूसरी ही किस्म का खजाना जमा करना चाहिए। तुम हर चीज़ को अधिक समझने और जानने की कोशिश करो। कोई भी चीज़ तुम्हारी नज़र से ना बच पाए। रुपए पैसे की जगह, तुम्हारे पास पैनी नजर होगी और सोने की जगह तेज दिमाग होगा। ऐसी दौलत जमा कर लेने पर तुम्हें किसी भी चीज़ की कभी कोई कमी ना रहे गी और तुम दूसरों के मुकाबले कभी कम नहीं रहोगे।

वक्त गुजरा और इसके कुछ दिनों बाद बूढ़ा आदमी चल बसा। भाई मिलकर बैठे और उन्होंने सारी स्थिति पर विचार किया और फिर बोले, हमारे पास यहाँ पर तो कुछ भी करने को नहीं है। आओ घूम फिर कर दुनिया को देखें। जरूरत होने पर हम चरवाहे या खेत मज़दूरों का काम कर लेंगे। हम कही पर भी क्यों ना हो, भूखे नहीं मरेंगे।

वे सभी सफर पर जाने के लिए तैयार हो गए और अगली ही सुबह अपने सफर पर चल दिए। उन्होंने सुनसान वीरान घाटियों और ऊंचे ऊंचे पहाड़ों को पार किया। इस तरह वे लगातार 40 दिनों तक चलते रहे। उनके पास जितनी खुराक थी, अब वह खत्म हो गई थी। वे थककर चूर हो गए और उनके पैरों में छाले पड़ गए थे। मगर सड़क थी कि खत्म होने को ही नहीं आ रही थी। वे आराम करने के लिए रुके और फिर आगे चल दिए।

आखिरकार उन्हें अपने सामने कुछ मकान नजर आने लगे। वे एक बड़े शहर के नजदीक पहुँच गए थे। तीनों भाई बहुत ही खुश हुए और जल्दी कदम बढ़ाने लगे। उन्होंने कहा, जो कुछ बुरा था, वह पीछे रह गया और आगे तो अच्छा ही अच्छा होने वाला है।

जब वे शहर के बिल्कुल निकट पहुँच गए तो सबसे बड़ा भाई अचानक रुका। उसने जमीन पर नजर डाली और बोला थोड़ी ही देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गुजरा है। वे थोड़ा और आगे गए तो मंझला भाई रुका, और सड़क के दोनों ओर नजर डालकर बोला वो ऊंट काना था। वे कुछ और आगे गए तो सबसे छोटे भाई ने कहा ऊपर एक औरत और एक बच्चा थे। बिल्कुल सही है, दोनों बड़े भाइयों ने कहा और वे तीनों फिर आगे बढ़ चले।

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थोड़ी देर बाद एक घुड़सवार उनके पास से गुजरा। सबसे बड़े भाई ने उसकी ओर देखकर पूछा, “घुड़सवार तुम किसी खोई हुई चीज़ को तलाश रहे हो ना?

घुड़सवार ने घोड़ा रोक कर जवाब दिया, हाँ।

तुम्हारा ऊंट खो गया है ना?” सबसे बड़े भाई ने पूछा

हाँ, बहुत बड़ा सा” घुड़सवार ने जवाब दिया।

वह काना है ना?” मंझले भाई ने पूछा ।

हाँ” घुड़सवार ने जवाब दिया।

एक छोटे से बच्चे के साथ उस पर एक औरत सवार थी ना?” सबसे छोटे भाई ने ये सवाल किया।

घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शक की नजर से देखा और बोला तो तुम तीनों के पास मेंरा ऊंट है, जल्दी बताओ तुमने उसका क्या किया?

भाइयों ने जवाब दिया, “हमने तुम्हारे ऊंट की शक्ल तक नहीं देखी

तो तुम्हे उसके बारे में ये सब बातें कैसे मालूम हुई?

क्योंकि हम अपनी आँखों और दिमाग से काम लेना जानते हैं”, भाइयों ने जवाब दिया और फिर बोले, “जल्दी से उस दिशा में अपना घोड़ा दौड़ाओ, वहाँ तुम्हारा ऊंट तुम्हें मिल जाएगा”।

नहीं” ऊंट के मालिक ने जवाब दिया।

मैं उस दिशा में नहीं जाऊंगा मेंरा ऊंट तुम्हारे पास है और तुम्हें ही उसे लौटाना पड़ेगा।

हमने तो तुम्हारे ऊंट को देखा तक नहीं। भाइयों ने परेशान होते हुए कहा, मगर घुड़सवार उनकी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं था। उसने अपनी तलवार निकाल ली और ज़ोर से घुमाते हुए तीनों भाइयों को अपने आगे आगे चलने का हुक्म दिया। इस तरह से वह उन्हें सीधा देश के बादशाह के महल में ले गया। इन तीनों भाइयों को सिपाहियों के पास पहुंचा कर वह खुद बादशाह के पास गया।

उसने बादशाह से कहा मैं अपने परिवार को पहाड़ों से लेकर आ रहा था और उसके लिए मैंने मेरी बीवी और छोटे से बच्चे को एक बड़े से ऊंट के ऊपर बिठाकर अपने पीछे पीछे ला रहा था। किसी तरह से उनका पीछे रह गया और वे रास्ते से भटक गई। मैं उन्हें खोजने के लिए गया तो मुझे रास्ते में तीन आदमी मिले, जो पैदल चले जा रहे थे। मुझे पूरा यकीन है कि इन्हीं ने मेरा ऊंट चुराया है और मेरी बीवी तथा बच्चे को मार डाला है।

जब वह आदमी अपनी बात पूरी कह चुका तो बादशाह ने पूछा, तुम ऐसा क्यों समझते हो? इसलिए की मैंने इन लोगों से इस बारे में एक भी शब्द नहीं कहा। फिर भी उन्होंने मुझे बताया की ओट बहुत बड़ा है और काना है। और उस पर एक औरत और बच्चे सवार हैं। बादशाह ने थोड़ी देर सोच विचार किया और फिर बोला, जैसा कि तुम कहते हो की तुम्हारे बताए बिना ही तुम्हारे ऊंट के बारे में उन्होंने सब कुछ ऐसे अच्छे ढंग से बयान किया तो जरूर उन्होंने ही उसे चुराया होगा। जाओ, उन चोरों को यहाँ पर लेकर आओ।

ऊंट का मालिक बाहर गया और तीनों भाइयों को साथ लेकर झटपट अंदर आ गया। बादशाह तीनों भाइयों को धमकाते हुए चिल्लाया,चोरों फौरन बताओ, फौरन जवाब दो तुमने इस आदमी का ऊंट कहा पर गायब किया है?

भाइयो ने जवाब दिया, हम चोर नहीं है और हमने इसका ऊँट कभी देखा भी नहीं। तब बादशाह बोला मालिक के कुछ बताए बिना तुमने ऊंट को बिल्कुल सही तौर पर बयान किया। अब तुम यह कहने की ज़ुर्रत कैसे करते हो की तुमने उसे देखा भी नहीं?

बादशाह, इसमें अचंभे की कोई बात नहीं है। भाइयों ने जवाब दिया, बचपन से ही हमे ऐसी आदत पड़ गयी है की हम किसी भी चीज़ को अपनी नज़र से चूकने नहीं देते। हमने चीजों को पैनी नजर से देखने और दिमाग से सोचने के काम में बहुत ही वक्त लगाया है। इसीलिए ऊंट को देखे बिना ही हमने यह बता दिया कि वह कैसा है। बादशाह ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा और बोला, “किसी चीज़ को देखे बिना ही उसके बारे में क्या इतना कुछ ये जानना मुमकिन हो सकता है?

हाँ मुमकिन है। भाइयों ने जवाब दिया।

बादशाह बोला तो ठीक है, हम अभी तुम्हारी सच्चाई की जांच पड़ताल करेंगे। बादशाह ने इसी समय अपने वजीर को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। वजीर फ़ौरन महल से बाहर चला गया, मगर बहुत ही जल्दी वह दो नौकरों के साथ लौटा। नौकर एक बड़ी सी पेटी उठाकर लाए थे। नौकरों ने पेटी को बड़ी ही सावधानी से दरवाजे के पास ऐसे रख दिया कि वह बादशाह को दिखाई दे सके और खुद नौकर एक तरफ हट गए।

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तीनों भाई दूर से ही खड़े उन्हें देखते रहे। उन्होंने इस बात को बहुत ही गौर से देखा की पेटी कहाँ से आई है और कैसे लाई गई थी। किस ढंग से उसे फर्श पर रखा गया था। बादशाह ने कहा हाँ, तो चोरो हमें बताओ कि उस पेटी में क्या है?

बादशाह सलामत हम तो पहले ही यह दर्ज कर चूके हैं कि हम चोर नहीं है, सबसे बड़े भाई ने कहाँ। पर यदि आप चाहते हैं तो हम आपको यह बता सकते हैं कि उस पेटी में क्या है। उसमें कोई छोटी सी गोल चीज़ है। तभी मंझला भाई बोल पड़ा, उसमें अनार है। साथ ही छोटे भाई ने जोड़ा हाँ, उसमें अनार है और वह भी अभी कच्चा है।

यह सुनकर बादशाह ने पेटी को नजदीक लाने का हुक्म दिया। नौकरों ने फौरन हुक्म पूरा किया। बादशाह ने नौकरों से पेटी को खोलने के लिए कहा। पेटी खुल जाने पर जब उसे उसमें कच्चा अनार दिखाई दिया तो उसकी हैरानी की कोई हद ना रही। आश्चर्यचकित बादशाह ने अनार निकालकर वहाँ पर हाजिर सभी लोगों को दिखाया तब उसने ऊँट के मालिक से कहा, इन लोगों ने यह साबित कर दिया कि ये लोग चोर नहीं है। वास्तव में यह बहुत ही समझदार लोग हैं। तुम कहीं और जाकर अपने ऊंट को तलाश करो।

बादशाह के महल में उस समय हाजिर सभी लोगों की हैरानी का कोई ठिकाना न था। मगर सबसे बढ़कर तो खुद बादशाह ही हैरान था। उसने सभी तरह के बढ़िया और लज़ीज़ खाने मंगवाए और लगा इन भाइयों की खातिरदारी करने लगा।

बादशाह ने कहा, तुम लोग बिलकुल बेकसूर हो और जहाँ भी जाना चाहो जा सकते हो, मगर जाने से पहले तुम सारी बात मुझे साफ साफ बताओ, तुम्हे यह कैसे पता चला की उस आदमी का ऊंट गुम गया है और तुमने कैसे जाना की ऊंट कैसा था?

सबसे बड़े भाई ने कहा धूल पर उसके पैरों के निशानों से मुझे मालूम हुआ कि कोई बहुत बड़ा ऊंट वहाँ से गुजरा है। जब मैंने अपने पास से गुज़रने वाले घुड़सवार को चारों ओर नजर दौड़ाते देखा तो उसी वक्त मेरी समझ मेँ यह बात आ गई कि वह क्या खोज रहा है।

बादशाह ने कहा, बोहुत खूब अच्छा, अब ये बताओ की तुम में से किसने इस घुड़सवार को यह बताया की ऊंट काना हैं? कानापन तो सड़क पर निशान नहीं छोड़ता।

मंझले भाई ने जवाब दिया, मैंने इस बात का अनुमान इसलिए लगाया कि सड़क के दाईं ओर की घास तो ऊंट ने चर ली थी, मगर बाईं ओर की घास ज्यों की त्यों थी।

बादशाह ने कहा, बोहुत खूब तुम में से ये अनुमान किसने लगाया था कि उस पर एक बच्चा और एक औरत सवार थे?

सबसे छोटे भाई ने जवाब दिया मैंने देखा कि एक जगह पर ऊंट के घुटने टेककर बैठने के निशान बने हुए थे। उनके करीब ही मुझे रेत पर जूतों के निशान दिखाई पड़े। साथ ही छोटे छोटे पैरों के निशान भी थे, जिसे मुझे मालूम चला कि ये जूते के निशान औरत के हैं और साथ में एक छोटा बच्चा भी है।

बहुत खूब तुमने बिल्कुल सही कहा। बादशाह बोला मगर तुम लोगों को यह कैसे पता चला कि पेटी में एक कच्चा अनार है? यह बात तो मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आ रही।

सबसे बड़ा भाई बोला जीस तरह से दोनों नौकर पेटी को उठाकर लाए थे। उससे बिल्कुल ज़ाहिर था कि वह ज़रा भी भारी नहीं है। जब वे पेटी को फर्श पर टिका रहे थे तो मुझे उसके अंदर किसी छोटी सी गोल चीज़ के लुढ़कने की आवाज सुनाई दी।

फिर मंझला भाई बोला, मैंने ऐसा अनुमान लगाया क्योंकि पेटी बगीचे की तरफ से लाई गई है और उसमें कोई छोटी सी गोल चीज़ है। तो यह जरूर अनार ही होगा। उसका कारण ये है की आपके महल के आसपास अनार के बहुत से पेड़ लगे हुए हैं।

बादशाह ने कहा बहुत खूब और उसने छोटे भाई से पूछा मगर तुमने यह कैसे पता चला लिया कि अनार कच्चा है?

इस वक्त तक बगीचे में सभी अनार कच्चे है। यह तो आप खुद भी देख सकते हैं। उसने जवाब दिया और खुली खिड़की की तरफ संकेत किया।

बादशाह ने बाहर देखा तो पाया कि बगीचे में लगे अनारो में सेसभी वृक्षों पर कच्चे अनार लटक रहे थे। बादशाह इन भाइयों की असाधारण पैनी नजर और तेज दिमाग से हैरान रह गया। बादशाह ने कहा, धन, दौलत और दुनियादारी की चीजों के नजरिये से तुम लोग बेशक अमीर नहीं हो, मगर तुम्हारे पास अकल का बहुत बड़ा खजाना जरूर है।

बादशाह उनकी तारीफ करने लगा और फिर बादशाह ने तीनों भाइयों को बहुत से कीमती उपहार दिए और बड़ी इज्जत के साथउन्हें रवाना किया। अब तीनों भाई गरीब नहीं थे। वे अब बहुत सी धन दौलत के मालिक थे। वे वापस अपने गांव पहुंचे और एक अच्छा जीवन बिताने लगे।

कहानी का सार ~ 3 बुद्धिमान भाई

कहानी का सार यह है कि हमें सतर्क रहना चाहिए और एक गहन पर्यवेक्षक बनना चाहिए। एक तेज़ दिमाग और तीव्र अवलोकन के साथ बुद्धि का उपयोग हमारे लिए चमत्कार कर सकता है।

यह कहानी जीवन के हर क्षेत्र में प्रासंगिक है।

आप क्या सोचते हैं? कृपया टिप्पणी करें।

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